282 नरकंकाल के अंतिम संस्कार की उठी मांग,पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार ने ब्रिटिश सरकार से मांगी शहीदों की डिटेल।

Vishal Dubey
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282 नरकंकाल के अंतिम संस्कार की उठी मांग:पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार ने ब्रिटिश सरकार से मांगी शहीदों की डिटेल
वाराणसी2 घंटे पहले
अजनाला कांड में मिली भारतीय सैनिकों की हड्डियां। - Dainik Bhaskar
अजनाला कांड में मिली भारतीय सैनिकों की हड्डियां।
'एक था अजनाला और उस अजनाला के 282 शहीद।' जिनकी शहादत के 177 साल बाद आज भी उनके नरकंकाल न्याय की गुहार लगा रहे हैं। धार्मिक रीति रिवाज से उनके अंतिम संस्कार की मांग उठ रही है। उनमें कुछ को जलाया जाना है और कुछ को दफनाना है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) , पंजाब विश्वविद्यालय से लेकर CCMB हैदराबाद तक के वैज्ञानिकों ने इन शहीदों के ससम्मान अंतिम संस्कार कराने की मांग की और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने ब्रिटिश सरकार को इन शहीदों के नाम-पते भारत को सौंपने के लिए चिट्ठी लिखी है।

आज से 20 साल पहले अमृतसर से 26 किलोमीटर दूर अजनाला गांव के एक कुएं (कलियांवाला खोह) में 282 नरकंकाल मिले थे। उन हड्डियों, खोपड़ी और दांत का DNA टेस्ट हुआ, तो यह पता चला था कि से हड्डियां की सेना के जवानों की हैं। ;इस दुर्दांत घटना का जिक्र एक किताब में भी मिला, जिसका नाम है 'द क्राइसिस ऑफ पंजाब'। इसमें जिक्र था कि ब्रिटिश सरकार से गद्दारी करने वाले 282 सैनिकों को क्रूरतम तरीके से मारकर कुएं में फेंक दिया गया है। ये गंगा घाटी के लड़ाके हैं। यह किताब भी इस रिसर्च टीम के हाथ लग गई।

पंजाब के इतिहासकार सुरेंदर कोचर ने 2003 में इसकी छानबीन शुरू कराई थी और कंकाल मिलने पर पंजाब के प्रो. सेहरावत ने CCMB हैदराबाद से DNA टेस्ट कराया। 2014 में BHU समेत कई विश्वविद्यालयों के जीन वैज्ञानिक जुड़े। इस सैन्य संहार में शामिल हवलदार आलम बेग की खोपड़ी के बारे में पता चला। इसके बाद साल 2020 में यह रिसर्च प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'फ्रंटियर्स इन जेनेटिक्स' में प्रकाशित हुआ और चर्चा में आ गया। किताब की कहानी सच हो गई।

अंतिम संस्कार कराने की मांग

अब वैज्ञानिकों का दल इन सैनिकों का अंतिम संस्कार कराना चाहता है। उन्हें मुक्ति दिलाने की मांग कर रहा है। BHU के जीन वैज्ञानिक प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे के अनुसार, कंकालों की स्टडी के बाद यह जानकारी भी मिली कि इन सैनिकों का नैटिव प्लेस कौन सा था यानी कि ये कहां के निवासी थे। ये सभी सैनिक गंगा घाटी स्टेट उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल के ही थे।

पीएम मोदी के आर्थिक सलाहकार ने लिखी चिट्ठी

इस संबंध में पीएम नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल ने ब्रिटिश सरकार को लेटर लिखा है। प्रो. चौबे ने बताया कि ब्रिटेन की सरकार के पास इन सभी शहीद सैनिकों के नाम, पता और तमाम डिटेल हैं। ब्रिटिश सरकार यदि इन्हें भारत सरकार को सौंप दे तो इन सभी सैनिकों के गांव और घर जाकर अंतिम संस्कार और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

रिसर्च की शुरुआत हुई ऐसे

इतिहास के इस रहस्मयी घटना की पहली परत खुली एक किताब 'द क्राइसिस ऑफ पंजाब' से। इसे 1857 क्रांति के दौरान अमृतसर में तैनात ब्रिटिश कमिश्नर फेडरिक हेनरी कूपर ने लिखा था। उसी ने अजनाला में ब्रिटिश रेजीमेंट को लीड किया था और भारतीय सैनिकों को क्रूरता से मरवाया। इस किताब में इसे कलियांवाला नरसंहार भी लिखा गया है। कहा गया है कि यूपी के बनारस और कानपुर में अंग्रेजों के खिलाफ भड़के गुस्से का बदला था। यदि ये घटनाएं न होतीं, तो कलियांवाला नरसंहार भी नहीं होता।

साल 2000 से पहले पंजाब की एक शोधार्थी ने इंग्लैंड में पहली बार इस किताब को पढ़ा था, जिसके बाद अजनाला गांव के एक गुरुद्वारे के नीचे कुएं में वैज्ञानिकों की टीम ने सर्वे किया। यहां पर उन्हें किताब की लिखी एक-एक बात अक्षरश: सच लगी। इस किताब में बताया गया है कि नरसंहार में मारे गए सैनिक ब्रिटिश रेजीमेंट से थे। सैनिकों ने गद्दारी करके युद्ध छेड़ दिया था। जिसके बाद हजारों की संख्या में ब्रिटिश सैनिकों ने इन्हें मौत के घाट उतार दिया।

आलम बेग की खोपड़ी में यही पर्ची मिली थी।

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