योगी सरकार 2.0 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा 52 मंत्री बनाए गए हैं। इनमें 18 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 20 राज्यमंत्री बनाए गए हैं। सीएम योगी शुरुआत से ही इस बात पर जोर देते रहे हैं कि मंत्री आपसी समन्वय के साथ काम करें। विकास के समग्र प्रयास के लिए ही उन्होंने 18 मंत्री समूह बनाए तो उसमें भी राज्यमंत्रियों को साथ लगाया। विभागीय कार्ययोजना के प्रस्तुतीकरण का अवसर उन्हें दिया, लेकिन वास्तविकता में राज्यमंत्री खाली हाथ ही रह गए।
कुछ विभागों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्री के बीच में काम का बंटवारा आज तक नहीं हो सका है। कुछ कैबिनेट मंत्री अपने राज्यमंत्रियों को बैठक आदि में तो बुलाते हैं, लेकिन इससे अधिक उनकी कोई भूमिका नहीं रहती।
हकीकत में विभागों के अंदरूनी हालात क्या हैं, यह दिनेश खटीक के वायरल पत्र में स्पष्ट है। इसमें बताया गया है कि अधिकारी बैठक की सूचना नहीं देते। पत्र का जवाब नहीं देते। कहने से कोई काम नहीं करते, यहां तक कि फोन पर भी ढंग से बात नहीं करते। कैबिनेट मंत्री और प्रमुख सचिव या अपर मुख्य सचिव ही विभागों की कमान अपने हाथ में थामे हुए हैं।
