हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना काशी विद्यापीठ को पड़ी महंगी:कुलपति और रजिस्ट्रार ने नहीं माना कोर्ट का फैसला, अब 2 महीने में 78 शिक्षकों को देने होंगे 3 करोड़ रुपए

Vishal Dubey
0

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में कांट्रैक्ट पर पढ़ाने वाले टीचरों (संविदा शिक्षक) के 1 साल तक चले लंबे संघर्षों के बाद आज इलाहाबाद हाइकोर्ट से न्याय मिल ही गया। अब काशी विद्यापीठ प्रशासन को 2 महीने के अंदर 78 टीचरों को मिलाकर करीब 3 करोड़ रुपए देने होंगे। 1 टीचर की सैलरी 25 हजार रुपए बनती है और अब विश्वविद्यालय प्रशासन को इन्हें कुल 14 महीने की सैलरी देनी होगी। इस हिसाब से एक संविदा टीचर को 3 लाख 50 हजार रुपए दिए जाएंगे।

न्यायालय ने काशी विद्यापीठ प्रशासन के इस कृत्य को अनुचित और नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया है। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि कोरोना काल में नौकरियां छीनना समानता के अधिकार के खिलाफ है। वहीं कोरोना के दौरान प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक शासनादेश के तहत किसी संविदा कर्मी की नौकरी नहीं खत्म की जा सकती। इसलिए सभी शिक्षकों को पिछले साल 1 जुलाई, 2020 से नियुक्त दी जाए। साथ ही 2 महीने के अंदर बकाए वेतन का भुगतान करके कोर्ट को सूचित करें। पिछले साल महामारी के ही दौरान इन सेल्फ फाइनेंस कोर्स में पढ़ाने वाले इन संविदा शिक्षकों के 5 साल का टर्म खत्म हुआ था। इसके बाद इनकी दोबारा नियुक्ति नहीं हुई थी। वहीं राज्य सरकार के शासनादेश के मुताबिक आंदोलन कर रहे शिक्षक कोर्ट का रुख किए थे।

शिक्षकों में खुशी, तो प्रशासन चिंतित

इस फैसले से जहां काशी विद्यापीठ के संविदा शिक्षकों में खुशी का माहौल है, तो वहीं एकेडमिक अधिकारियों के माथे पर शिकन आ गई है। चिंता इस बात की है कि इतने कम समय में इतना भुगतान कैसे करेंगे?

24 घंटे तक लगातार चला था धरना

दिसंबर 2020 में इन शिक्षकाें ने 24 घंटे तक लगातार विद्यापीठ के प्रशासनिक भवन में मौजूद गांधी जी की मूर्ति के सामने धरना दिया था। इन्होंने तब अपने 5 महीनों के बकाया वेतन की मांग की थी। विश्वविद्यालय ने अनसुना कर दिया तो 40 संविदा शिक्षकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर कर दिया था। इस पर न्यायमूर्ति अनिल कुमार राय ने इस पर अपना फैसला देते हुए कहा कि सेल्फ फाइनेंस कोर्स के टीचर्स का सेवा विस्तार जारी रहेगा। इसके बावजूद विश्वविद्यालय के तात्कालिक कुलपति प्रोफेसर टीएन सिंह और रजिस्टार साहेब लाल मौर्या ने इस आदेश को मानने से इंकार दिया था। अब कोर्ट ने विद्यापीठ को फटकार लगाते हुए वेतन जारी करने की बात कही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई होगी तो उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)
To Top