प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरुषों की भारतीय हाकी टीम के कांस्य पदक जीतने पर रिटर्न गिप्ट दिया है। अब राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यान चंद के नाम से जाना जाएगा। यह सम्मान सभी खिलाडिय़ों के लिए है। खासकर हाकी के गौरव को बनाए रखने का प्रयास है। इसे सामान्य नजर से न देखकर विपक्ष राजनीति के चश्मे से देख रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कहना भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजन डा.एलएस ओझा का।
कांग्रेस नेताओं को दिल बड़ा करने की जरूरत
उन्होंने कहा कि खेल पुरस्कार का नाम खिलाड़ी के नाम पर करने का सिर्फ एक उद्देश्य है कि खेल की दुनिया के सब से बड़े खिलाड़ी को उसका गौरव मिल सके। जिस खिलाड़ी को कई साल पहले भारत रत्न मिल जाना चाहिए था उसे आज तक वह सम्मान नहीं मिला। सच तो यह है कि इस मसले पर भाजपा ने कभी कोई विवाद या राजनीति नहीं की। अब भारतीय टीम ने ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन किया। महिलाओं की टीम ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। इसे देखते हुए खिलाडिय़ों को प्रेरित करने के उद्देश्य से यह नाम परिवर्तित किया गया है। आखिर जाने कितने स्टेडियम, मैच व ट्राफी के नाम पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के नाम पर है। उसे तो भाजपा नहीं बदल रही है। न कोई ऐसा करने का उद्देश्य है। न किसी व्यक्ति, परिवार या राजनीतिक दल के सम्मान के साथ छेड़छाड़ का इरादा है। यह नाम परिवर्तन सिर्फ इस बात का प्रयास है कि खेलों को भी महत्व दिया जा रहा है। यदि खिलाड़ी बेहतर करेंगे तो उन्हें और प्रमोशन मिलेगा। इस छोटी सी बात को लेकर राजनीतिक दल विवाद पैदा कर रहे हैं। कांग्रेस के साथी इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि वह अपने कमंडल से एक छोटी से बूंद खिलाडिय़ों के हिस्से में दे रहे हैं। यदि वह बड़ा दिल दिखाएं और स्वागत करें तो प्रत्येक खिलाड़ी को अच्छा लगेगा। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेल को विश्व स्तर के हिसाब से और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
