विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा बूथ समितियों को मजबूत करने में जुट गई है। समितियों के सत्यापान का काम शुरू हो गया है। भाजपा ने 2017 का चुनाव भी बूथ समितियों की बदौलत लड़ा था। 2022 का चुनाव भी उसी तर्ज पर लड़ने की तैयारी चल रही है। बूथ सत्यापन के इस कार्य पर प्रदेश के बड़े नेताओं की भी नजर रहेगी।
बूथ समिति को लेकर भाजपा गंभीर
भाजपा 1990 से बूथ समितियों को मजबूत करने का नारा देती आई है। एक बूथ-20 यूथ का नारा बहुचर्चित है, मगर बूथ कमेटियों को भाजपा कभी मजबूत नहीं कर पाई। अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद से बूथ समितियां अपने वजूद में आईं। बूथ अध्यक्ष के साथ 21 सदस्य सक्रिय होने लगे। बूथ अध्यक्ष का महत्व यहां तक बढ़ गया कि पार्टी बड़े कार्यक्रमों में बूथ अध्यक्ष को मंच पर बिठाने लगी। यहां तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं बूथ अध्यक्ष को सम्मानित करने लगे। बतौर मुख्य अतिथि बूथ अध्यक्षों को बुलाया जाने लगा। इससे अध्यक्षों का हौसला बढ़ने लगा, वो चुनाव में अपनी कमेटियों के साथ सक्रिय होने लगे। बूथ समितियों को लेकर भाजपा इतनी गंभीर हो गई कि बूथ के प्रभारी नियुक्त किए जाने लगे। बूथ प्रभारी जिले और महानगर के नेताओं को बनाया जाने लगा। यहां तक कि लखनऊ से कभी भी फोन करके प्रभारियों से बूथ कमेटी के बारे में जानकारी कर ली जाती थी। इससे भाजपा के जिला और महानगर अध्यक्ष सबसे अधिक बूथ समितियों पर ध्यान देने लगे, जिससे समितियों की सक्रियता बढ़ती चली गई।
