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वाराणसी।
कबीर नगर, दुर्गाकुंड निवासी चन्द्र चूर प्रताप देव ने अपने मकान पर कथित अवैध कब्जा, न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद निर्माण कार्य कराने तथा उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग के एक कर्मचारी द्वारा पद और वर्दी के प्रभाव का दुरुपयोग किए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थी का कहना है कि वह वर्षों से अपने ही मकान के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
प्रार्थी चन्द्र चूर प्रताप देव के अनुसार उन्होंने वर्ष 1989 में अपनी स्वयं की कमाई से बी-34/65ए, कबीर नगर स्थित भवन खरीदा था तथा बाद में उसमें अपने संसाधनों से निर्माण भी कराया था। उन्होंने बताया कि पारिवारिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए अपने तीन भाइयों को काशी में आने-जाने तथा उनके बच्चों की शिक्षा की सुविधा के लिए एक-एक कमरा रहने हेतु दिया था। समय बीतने के साथ बड़े भाई स्वर्गीय उदय प्रताप देव और उनके परिवार ने कमरा खाली कर दिया, लेकिन अन्य भाइयों के परिवारों द्वारा कमरों को खाली नहीं किया गया।
प्रार्थी का आरोप है कि स्वर्गीय भूपेन्द्र प्रताप देव के पुत्र राजपाल प्रताप देव तथा स्वर्गीय विजय प्रताप देव के पुत्र हृदय प्रताप देव ने कमरों में ताला लगाकर कब्जा बनाए रखा। जबकि दोनों परिवारों ने अशोकपुरम कॉलोनी में अपना अलग मकान बनाकर निवास शुरू कर दिया, फिर भी प्रार्थी के भवन पर दावा और कब्जा बनाए रखा गया। आरोप है कि विवाद को बढ़ाने और दबाव बनाने के उद्देश्य से राजपाल प्रताप देव ने अपने मामा अमित कुमार सिंह को भी भवन में रहने के लिए रख दिया, जो उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग में कार्यरत हैं और वर्तमान में जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध बताए जाते हैं।
चन्द्र चूर प्रताप देव का कहना है कि फरवरी 2026 में जब उन्होंने अपने जर्जर भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण का प्रयास किया तो राजपाल प्रताप देव, हृदय प्रताप देव और अमित कुमार सिंह ने उन्हें निर्माण कार्य करने से रोक दिया। उनका आरोप है कि उनके इकलौते पुत्र मारकण्ड प्रताप देव के साथ भी कई बार अभद्र व्यवहार किया गया तथा उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर घर से भगा दिया गया।
प्रार्थी ने बताया कि उन्होंने 22 फरवरी 2026 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या 40019726007361 दर्ज कराई थी। इसके अलावा कई बार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र दिया गया तथा डायल-112 पर सूचना दी गई। इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि होमगार्ड कर्मचारी अमित कुमार सिंह द्वारा अपने पद और वर्दी का प्रभाव दिखाकर स्थानीय स्तर पर दबाव बनाया जाता रहा, जिसके कारण उन्हें न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है।
न्याय न मिलने पर प्रार्थी ने सिविल न्यायालय की शरण ली और सिविल वाद संख्या 670/2026 दाखिल किया। वहीं दूसरी ओर राजपाल प्रताप देव द्वारा भी सिविल वाद संख्या 738/2026 दायर किया गया। दोनों मामले वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं। प्रार्थी का कहना है कि कई तिथियों पर विपक्षी पक्ष न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ, जिससे मामले का निस्तारण लंबित है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि न्यायालय में वाद लंबित होने के बावजूद प्रार्थी की अनुपस्थिति में भवन पर निर्माण कार्य करा लिया गया। प्रार्थी के अनुसार जब वह अपने गांव गए हुए थे, उसी दौरान राजपाल प्रताप देव और अमित कुमार सिंह ने कथित रूप से निर्माण कार्य कराया। इसकी सूचना उनके पुत्र मारकण्ड प्रताप देव द्वारा 3 जून 2026 को भेलूपुर थाने में दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रार्थी स्वयं को विकलांग और असहाय बताते हुए कहते हैं कि उन्हें अपने पुत्र की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। उनका आरोप है कि विपक्षी पक्ष की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है और भविष्य में किसी अप्रिय घटना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वह अपने ही मकान में न तो निर्माण करा पा रहे हैं और न ही उनका पुत्र वहां रह पा रहा है। परिणामस्वरूप उन्हें किराए के मकान में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
चन्द्र चूर प्रताप देव ने यह भी आरोप लगाया कि मकान के जल कनेक्शन वाले स्थान पर निर्माण करा दिया गया है, जिससे भविष्य में उन्हें पानी जैसी मूलभूत सुविधा से भी वंचित होना पड़ सकता है। उनका कहना है कि यह उनके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और उन्हें आर्थिक, मानसिक तथा सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
प्रार्थी ने प्रशासन, पुलिस विभाग और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, न्यायालय में मामला लंबित रहते हुए कराए गए कथित अवैध निर्माण की जांच करने, अवैध कब्जा हटवाने तथा होमगार्ड पद के कथित दुरुपयोग की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और प्रशासन पर पूरा भरोसा है तथा उम्मीद है कि उन्हें उनके अधिकारों के अनुरूप न्याय मिलेगा।