Varanasi : बीएचयू में नियमितीकरण की मांग ने पकड़ा जोर: 199 जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा पर रोक की मांग, रातभर डटी रहीं महिला कर्मचारी

Vishal Dubey
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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में 199 जूनियर क्लर्क पदों की भर्ती परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है।


 विश्वविद्यालय के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पिछले 5 दिनों से बीएचयू स्थित मधुवन में धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि जब तक उनके नियमितीकरण का मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक नई भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।



धरने पर बैठे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उनके नियमितीकरण को टाला जा रहा है, जबकि अब नई भर्ती के माध्यम से बाहरी नियुक्तियां करने की तैयारी की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय को 20 से 40 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी हैं, ऐसे में उन्हें प्राथमिकता दिए बिना नई भर्ती करना अन्यायपूर्ण है।


*उत्पीड़न के आरोप, रातभर चला प्रदर्शन*



कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें केंद्रीय कार्यालय से हटाकर मधुबन क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया और फिर धरना स्थल की बिजली तक काट दी गई। तेज गर्मी और अंधेरे में रात बिताने को मजबूर कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ गया, जिसके बाद वे सड़क पर उतर आए। भारी विरोध के बाद प्रशासन को बिजली आपूर्ति बहाल करनी पड़ी।

महिला कर्मचारी भी अब इस आंदोलन का हिस्सा बन चुकी हैं। शनिवार को करीब सौ महिला कर्मचारियों ने पूरी रात धरने पर बैठकर विरोध जताया। शाम को कर्मचारियों ने परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर से एमएमवी चौराहे तक शांति मार्च भी निकाला।



*समिति पर सवाल, भर्ती अधिसूचना ने बढ़ाया तनाव*



प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमितीकरण के लिए एक समिति तो बनाई, लेकिन समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही 7 अप्रैल 2026 को 199 जूनियर क्लर्क पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी कर दी गई। कर्मचारियों का आरोप है कि यह कदम समिति की प्रक्रिया को दरकिनार करने जैसा है।


कर्मचारियों का कहना है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित भर्ती परीक्षा उनके भविष्य पर सीधा प्रहार है। उनका तर्क है कि यदि नियमितीकरण से पहले ही रिक्त पदों को भर दिया गया, तो वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों के लिए कोई अवसर नहीं बचेगा।


*प्रशासन की निगरानी और नौकरी का डर*


धरने पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासन उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और हाजिरी को लेकर भी दबाव बनाया जा रहा है, जिससे नौकरी जाने का डर बना हुआ है। उनका कहना है कि ऐसी परिस्थितियां आंदोलन को कमजोर करने के प्रयास का हिस्सा हैं।


*समाजवादी पार्टी का समर्थन, कुलपति को ज्ञापन*



कर्मचारियों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के एमएलसी आशुतोष सिन्हा और पूर्व पार्षद वरुण सिंह ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों को समर्थन दिया। दोनों नेताओं ने कुलपति से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा और कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग की।

एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों की अनदेखी कर नई भर्ती करना जनहित में नहीं है। वहीं पूर्व पार्षद वरुण सिंह ने कहा कि वर्षों से स्थायी होने की उम्मीद में कार्यरत कर्मचारियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।



*मुख्य मांगें स्पष्ट*


*कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगें हैं*


• नियमितीकरण का अंतिम निर्णय होने तक जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा को स्थगित किया जाए।


• लंबे समय से कार्यरत संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को उनके अनुभव के आधार पर प्राथमिकता दी जाए।


• उत्पीड़न, स्थानांतरण और बुनियादी सुविधाओं में कटौती जैसे कदम तुरंत रोके जाएं।


*आंदोलन तेज करने की चेतावनी*


कर्मचारियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात हैं।


कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि सम्मान और वर्षों की सेवा के हक की लड़ाई है।

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