पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान मतदाताओं को साधने का सियासी संदेश दिखाई दिया। पीएम मोदी ने राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को साथ रखकर किसानों को साधने की कोशिश की। मेरठ की जनसभा ने साफ कर दिया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान व जाट समीकरण अब भी निर्णायक भूमिका में हैं।
मेरठ के शताब्दीनगर में नमो भारत रैपिड और मेट्रो के शुभारंभ से लेकर जनसभा तक चौधराहट की राजनीति भी केंद्रित रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को पूरे कार्यक्रम में अपने साथ रखकर सियासी संदेश दिया।
मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें भारत रत्न देने का सौभाग्य मिला है। प्रधानमंत्री के बयान और मंचीय संकेत ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गईं।
2027 के विधानसभा चुनाव में रालोद मुखिया जयंत चौधरी का क्या रूख रहेगा, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा। लेकिन मोदी ने स्पष्ट कर दिया कि चौधराहट की तवज्जो बरकरार है और रहेगी। जनसभा में रालोद कार्यकर्ताओं, किसानों और जाट नेताओं में उत्साह भी देखने को मिला। चौधरी चरण सिंह का नाम लेते ही सभा स्थल मोदी के नारों से गूंज उठा।
मंच से दिखी राजनीतिक केमिस्ट्री
रैपिड मेट्रो के शुभारंभ के दौरान प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ जयंत चौधरी को प्रमुखता से अपने पास रखा। जनसभा में भी मोदी-योगी के ठीक बगल वाली कुर्सी जयंत चौधरी को दी गई, जिसे राजनीतिक जानकार विशेष संकेत के रूप में देख रहे हैं।
मंच पर मौजूद सांसद अरुण गोविल, राज्यसभा सदस्य, विधायक और एमएलसी का नाम प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में नहीं लिया। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का उल्लेख विशेष रूप से किया।