BHU में कुलपति चयन को लेकर स्थितिहो गई स्पष्ट:शिक्षा मंत्रालय ने रेक्टर को सौंपे VC जैसे प्रशासनिक अधिकार

Vishal Dubey
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में कुलपति पद रिक्त रहने के बीच उपजे प्रशासनिक असमंजस को शिक्षा मंत्रालय ने अपने पत्र से दूर कर दिया है। मंत्रालय ने BHU एक्ट की धारा 7B(5) और 7C(5) का हवाला देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं होती, तब तक रेक्टर को कुलपति जैसे प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार प्राप्त होंगे।

क्या कहा गया है पत्र में?
पत्र के अनुसार कार्यवाहक कुलपति (रेक्टर) को यह अधिकार होगा कि वह

 विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद एवं वित्त समिति की बैठक बुला सकें,
 सभी आवश्यक प्रशासनिक कार्य संपन्न कर सकें,
लेकिन उन्हें विश्वविद्यालय के विधान में संशोधन, नई नियुक्तियों या पदों के सृजन जैसे फैसले लेने की अनुमति नहीं होगी।

रेक्टर प्रो. संजय कुमार को मिला अधिकार
BHU में 7 जनवरी 2025 से कुलपति का पद खाली है और रेक्टर प्रो. संजय कुमार कार्यवाहक कुलपति की भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित एक अवमानना याचिका के कारण प्रशासनिक निर्णय अटक गए थे। इसी को लेकर विश्वविद्यालय ने शिक्षा मंत्रालय से दिशा-निर्देश मांगे थे, जिसके बाद यह पत्र जारी हुआ।

अभी नहीं होगा नया VC घोषित
शिक्षा मंत्रालय के इस पत्र से स्पष्ट हो गया है कि नए कुलपति की नियुक्ति में अभी वक्त लगेगा। तब तक रेक्टर ही विश्वविद्यालय के अधिकांश प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करेंगे।

BHU में पहली बार नहीं हुआ हस्तक्षेप
यह पहली बार नहीं है जब BHU के प्रशासनिक मामलों में शिक्षा मंत्रालय या UGC को हस्तक्षेप करना पड़ा हो। इससे पहले भी पीएचडी प्रवेश प्रणाली, विभागाध्यक्षों की नियुक्ति और शिक्षक चयन में वरिष्ठता विवाद को लेकर मंत्रालय ने दखल दिया है।


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