ज्ञानवापी और श्रृंगार गौरी के बाद अब दूसरी धर्मस्थली लाट भैरव/कपाल भैरव का मामला भी तूल पकड़ रहा है। वाराणसी जिला न्यायालय में आज काशी के लाट भैरव/.कपाल भैरव विराजमान व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य नाम से मुकदमा दाखिल किया गया है। इस पर आज दोपहर 2 बजे से वाराणसी कोर्ट में सुनवाई होगी।
यह मुकदमा विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह विसेन, भतीजी राखी सिंह और उनके परिवार द्वारा दााखिल किया गया है। विसेन परिवार के एडवोकेट शिवम गौर के माध्यम से सिविल जज सीनियर डिविजन वाराणसी की कोर्ट में इसे दिया गया है।लाट भैरव की पूजा और राग-भोग से संबंधित मांग की गई है। कहा जाता है कि 700 साल पहले तक यहां पर साधुओं कर समाधि थी और अब यह जगह कब्रगाह के रूप में तब्दील हो गया है।
700 साल में 24 घट गई मूर्ति की हाईट
वाराणसी के जैतपुरा स्थित लाट भैरव को काशी के अष्ट भैरव में सबसे ऊंचा दर्जा प्राप्त है। वहीं, दक्षिण भारत में लाट भैरव को कपाल भैरव के नाम से भी जानते हैं। स्कंधपुराण में लाट भैरव का उल्लेख कपाल भैरव नाम से हुआ है। कहा जाता है कि 13वीं सदी में लाट भैरव की ऊंचाई 32 फीट थी, अब सिर्फ 8 फीट ही लंबाई रह गई है। तब यहां पर 20 हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र साधु-संतों की समाधियां थीं। 13वीं शताब्दी में जौनपुर के इब्राहिम शाह शर्की ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया था। वहीं, औरंगजेब के काल में इस स्थान पर कब्जा कर लिया गया था।
मंदिर के चारों ओर कब्रगाह
लाट भैरव की भव्य प्रतिमा के चारों ओर कब्र बनाए गए हैं। वहीं, इस प्रतिमा की सुरक्षा वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस के हाथ में हैं। लाट भैरव में नियमित पूजा को लेकर सबसे पहले मुकदमा जनवरी, 2021 में दायर किया गया था। जिस पर अभी कोर्ट का कोई फैसला नहीं आया है। जितेंद्र सिंह विसेन ने कहा कि साल 2021 वाला केस भी उन्होंने अनुराग त्रिवेदी के माध्यम से फाइल कराया था।
