8 लाख लेकर दिया BHU में नौकरी का ऑफर,कोर्ट के हस्तक्षेप पर 3 साल बाद FIR

Vishal Dubey
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में पति-पत्नी को नौकरी दिलाने के नाम पर 8 लाख रुपए की ठगी हुई। BHU पहुंचे पीड़ित पति-पत्नी के कॉल लेटर लेकर को अधिकारियों ने फर्जी करार दिया। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के लंका थाने में रिपोर्ट दर्ज कर लिया गया है। लेकिन, यह मामला 3 साल पुराना है। 13 जनवरी, 2020 का। पीड़ित अपनी शिकायत को लेकर 3 साल से पुलिस और कोर्ट के चक्कर लगाता रहा। आज कोर्ट के निर्देश पर लंका थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

आइए, जानते हैं कैसे दिया था नौकरी का झांसा

पीड़ित जौनपुर स्थित चंदवक निवासी संजय कुमार और उसकी पत्नी है। इन्होंने जौनपुर के ही थाना नेवढ़िया ​​​​​​निवासी अशोक कुमार दुबे पर ठगबाजी और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। संजय ने पुलिस से कहा, ''वह काफी टाइम से बेरोजगार था। जौनपुर शहर में एक दिन अशोक ने उससे कहा- तुम शिक्षित बेरोजगार हो। तुम्हें तो BHU में अच्छी नौकरी पर लगवा सकता हूं। उसने कहा, BHU में मेरी ऊंची पहुंच है। चिंता न करो पैसे दे दो। डील 8 लाख रुपए में फाइनल हो गई।''

20 हजार रुपए पहले, फिर बाद में दिए 8 लाख

इस डील में संजय के साथ ही उसकी पत्नी साधना कुमारी को भी नौकरी दिलाने की शर्त शामिल थी। संजय बोला- डील के दौरान 20 हजार रुपए जमा करने को कहा गया। मैंने कर दिया। इसके बाद मुझसे कहा गया कि कॉल लेटर मिलते ही 8 लाख रुपए कैश देने पड़ेंगे। कुछ दिन बाद मुझे BHU के विश्वनाथ मंदिर के बाहर बुलाया गया। जहां मैंने उसे 4 लाख रुपए दिए। इसके बाद 13 जनवरी, 2020 को उसने मुझे फिर से BHU कैंपस बुलाया। BHU में संजय कुमार और साधना कुमारी के नाम पर नौकरी का कॉल लेटर दे दिया गया। उसी के साथ उसने बाकी के 4 लाख रुपए भी हमसे ले लिए।

स्टांप पेपर पर लिखकर दिया, वापस कर दूंगा

संजय कुमार ने कहा कि यह पैसा मैं उधार लेकर आया था। खैर, जब ये कॉल लेटर लेकर मैं BHU के सेंट्रल ऑफिस में गया तो, पता चला कि कॉल लेटर फर्जी है। इसके बाद हम पति-पत्नी के होश उड़ गए। पीड़ित संजय ने कहा कि सरकारी कागजों का दुरुपयोग करके फर्जी कॉल लेटर हमें थमाया गया। हमारा पैसा हड़पा गया। मैंने जब उन लोगों से अपना पैसा वापस मांगा तो स्टांप पेपर पर लिखकर दिया गया कि पैसा वापस कर दूंगा। लेकिन, पैसे नहीं दिए गए। फिर से पैसे मांगे तो हम पर जातिसूचक अपशब्दों का प्रयोग किया गया। यही नहीं, जान से मारने की धमकी भी दी। संजय ने कहा कि मेरी तहरीर पर लंका थाने में मुकदमा नहीं दर्ज किया जा रहा था तो मैंने तात्कालिक पुलिस कमिश्नर और कोर्ट से गुहार लगाई। अब जाकर कोर्ट के हस्तक्षेप पर मामले को दर्ज किया गया है।

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