बनारस मौज मस्ती और गंगा के घाटों का शहर है, घाट यहां संस्कृति भी है और संस्कार भी है। अगर बनारस में गंगा और घाट को अलग कर जाए तो बनारस का मिजाज रेगिस्तान हो जाएगा। बनारसियों के सबसे सुकून के पल गंगा की लहरों के किनारे घाट पर बैठने पर बीतता है। लेकिन, इस बार बनारसियों को अपनी अलमस्त जिंदगी को जीने के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी।सोशल मीडिया पर इस प्रशासनिक कदम को लेकर हो रही आलोचना को देखते हुए अंतत: प्रशासन को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
