डॉ. असफ ने बताया कि 90 के दशक में इजराइल की नदियों का बड़ा बुरा हाल था। प्रदूषण की वजह से नदियों में एक फीसदी भी साफ पानी नहीं बचा था। मगर, अब सभी नदियों का पानी पूरी तरह से पीने योग्य है। भारत में सिर्फ 30 फीसदी गंदा पानी ही साफ किया जाता है। जबकि इजराइल का 95% पानी दोबारा उपयोग में आता है।
नदियों में न छोड़ा जाए सीवेज जल
डॉ. असफ ने वरुणा नदी के उद्गम से लेकर मुहाने तक का दौरा करने के साथ BHU के वैज्ञानिकों, जल निगम, नगर निगम और सिचाई विभाग के अधिकारियों संग मीटिंग की। पानी में गंदगी कहां-कहां से मिल रही है और इसे कैसे रोक सकते हैं इस पर बात की।
उन्होंने भगवान पुर एसटीपी में नाले को नदी में गिरते देखा तो कि सीवेज का पानी ट्रीट करके वापस नदियों में न छोड़ा जाए। यह काम हमने इजराइल में बंद कर दिया है। तभी हमारी नदियां प्रदूषण से बच पाईं और अब पानी पीने लायक हो गया है।
