कहा- हम ऐसी हरकतों से डरने वाले नहीं
अरुण पाठक पहले शिवसेना से जुड़े रहे हैं। वह ज्ञानवापी परिसर स्थित मां शृंगार गौरी के मंदिर में नियमित दर्शन-पूजन के लिए 30 साल से संघर्ष कर रहे हैं। वह इस्लाम विरोधी और हिंदुत्व के समर्थन में लगातार बयानबाजी करते हैं। साथ ही कार्यक्रमों भी करते हैं।
अरुण पाठक ने चिट्ठी के जवाब में कहा, "हम ऐसी छुटभैया किस्म की हरकतों से डरने वाले नहीं हैं। हम बाला साहब ठाकरे के शिष्य हैं और छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं। सनातन धर्म के लिए हमारी आवाज हमेशा बुलंद मिलेगी।"
चिट्ठी में लिखा- तेरे दोस्त कमलेश के पास पहुंचा देंगे अरुण पाठक ने बताया कि चिट्ठी में लिखा है, "तुझे भी तेरे दोस्त कमलेश तिवारी और कन्हैया लाल के पास जल्द पहुंचा दिया जाएगा। नूपुर शर्मा का साथ देने वालों का जो हश्र किया है, तेरा भी वही हाल करेंगे। तेरे और तेरे जैसों के रहते हुए हम लोगों का गजवा-ए-हिंद का सपना कभी पूरा नहीं होगा। इसलिए तेरे और तेरे परिवार का खात्मा जरूरी है।"
सबसे नीचे लिखा है- "हम हैं नबी के नेक बंदे... दारुल इस्लाम...। " अरुण पाठक ने कहा कि मेरे शरीर में जान रहेगी, तब तक जिहादियों का सपना कभी पूरा नहीं होगा।
