बिजली उपभोक्ताओं की व्यथा का निवारण करने के लिए गठित फोरम छह माह से बंद है। फोरम चेयरमैन के बाद तकनीकी सदस्य के सेवानिवृत्त होने के बाद भी उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की ओर से कोई नियुक्ति नहीं की गई। इससे मुकदमों की सुनवाई नहीं हो रही। लंबित 70 मुकदमे में सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है।
प्रदेश सरकार ने यूपी के 20 शहरों में विद्युत उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम का गठन किया है ताकि उपभोक्ताओं के बिजली बिल, कनेक्शन का स्थाई विच्छेदन, मीटर समस्या, लोड फैक्टर, विद्युत सप्लाई, फाल्ट, ट्रांसफार्मर व पोल बदलवाने जैसे मामलों का समाधान न्याय पीठ के जरिए हो सके। फोरम के संचालन के लिए चेयरमैन, तकनीकी सदस्य व सचिव की एक संयुक्त पीठ बनाई गई है लेकिन यहां न तो चेयरमैन हैं और न तकनीकी सदस्य। इससे फोरम छह माह से बंद है।
फोरम के कर्मचारियों का कहना है कि चेयरमैन श्याम बिहारी राय नौ मई 2019 व तकनीकी सदस्य विजय रंजन सिन्हा अक्टूबर 2021 को रिटायर्ड हो गए। इन दोनों के सेवनिवृत्त होने से बिजली विभाग के एक्ट के तहत कोरम पूरा नहीं हो पा रहा है जिससे मुकदमों की सुनवाई 22 अक्टूबर 2021 से बंद है। एक्ट में प्रविधान है कि दो सदस्य सुनवाई के लिए अनिवार्य होने चाहिए।
चार जनपदों में जन अदालत भी हुए बंद
विद्युत उपभोक्ताओं की त्वरित समस्याओं का समाधान जन अदालत के जरिए भी करने का प्रविधान है लेकिन फोरम के बंद चलने की वजह से चार जनपदों के उपभोक्ताओं के लिए जन अदालत भी नहीं लग पा रही है। यही सदस्य इन जनपदों में पहुंचकर तत्काल मौके पर ही सुनवाई करके समस्या का समाधान करते हैं। बनारस जिले में हर महीने की तीन व तीस तारीख को जन अदालत लगती है। इसी तरह 10 को चंदौली, 17 को जौनपुर व 24 को गाजीपुर के लिए जन अदालत लगती है।
