वाराणसी में 2 साल 9 माह पहले 5000 रुपए घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए दरोगा महेश सिंह को उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। महेश सिंह की बर्खास्तगी का आदेश विभागीय जांच के बाद वाराणसी कमिश्नरेट के अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय एवं अपराध) सुभाष चंद्र दुबे ने दिया है। SI महेश सिंह मऊ जिले के कोपागंज थाना अंतर्गत इंदारा मझकी पट्टी गांव का मूल निवासी है और वर्तमान समय में जौनपुर जिले में तैनात था।
बता दें कि एक हफ्ते में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब भ्रष्टाचार में संलिप्त दरोगा को अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय एवं अपराध) ने बर्खास्त करने का आदेश दिया है। इससे पहले बीती 21 दिसंबर को इटावा जिले में तैनात दरोगा गीता यादव बर्खास्त की गईं थीं।
घूस मांगे जाने से परेशान होकर की थी शिकायत
मार्च 2019 में SI महेश सिंह सिगरा थाने की सोनिया पुलिस चौकी प्रभारी के पद पर तैनात था। जालपा देवी रोड कबीरचौरा निवासी राजकुमार गुप्ता द्वारा दर्ज कराए गए धोखाधड़ी के मुकदमे की विवेचना SI महेश सिंह को मिली थी। राजकुमार ने एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत की थी मुकदमे में कार्रवाई के लिए SI महेश सिंह द्वारा बार-बार पैसे की मांग की जाती है। SI महेश सिंह कहता है कि 10 लाख रुपए का प्रकरण है, तुम पैसे खर्च करो तो कार्रवाई हो। राजकुमार की शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो की ट्रैप टीम ने उसे SI महेश सिंह को 5 हजार रुपए देने को कहा।
23 मार्च 2019 को राजकुमार केमिकल युक्त नोट लेकर सोनिया चौकी पहुंचा और SI महेश सिंह को जैसे ही थमाया वैसे ही एंटी करप्शन ब्यूरो की ट्रैप टीम ने उसे घूस लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। SI महेश सिंह के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से कैंट थाने में मुकदमा दर्ज करा कर उसे पुलिस को सौंप दिया गया। पुलिस ने SI महेश को अदालत में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
1994 में सिपाही के पद पर हुआ था भर्ती
SI महेश सिंह पुलिस विभाग में वर्ष 1994 में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। उत्कृष्ट सेवा अभिलेख के आधार पर वर्ष 2015 में उसे सिपाही से सब इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट किया गया था। इस बीच वह कभी किसी गलत काम के लिए विभाग की ओर से दंडित नहीं किया गया था। वहीं, 5000 रुपए घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद SI महेश सिंह का कहना था कि राजकुमार ने उसे मिठाई खाने के लिए पैसा खुद देकर फर्जी तरीके से फंसा दिया है।
पुलिस बल में रहने लायक नहीं है महेश
अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय एवं अपराध) सुभाष चंद्र दुबे ने दैनिक भास्कर से कहा कि SI महेश सिंह की विभागीय जांच कराई गई थी। महेश सिंह ने अपने बचाव में जो भी तर्क और तथ्य रखे वह आधारहीन, बलहीन और असत्य थे। महेश सिंह के कृत्य से अनुशासित पुलिस बल की छवि समाज में धूमिल हुई है और एक गलत संदेश गया है।
ऐसे व्यक्ति के पुलिस विभाग में रहने का दुष्प्रभाव अन्य पुलिसकर्मियों पर भी पड़ेगा। विभागीय जांच में यह बात साबित हुई कि SI महेश सिंह पुलिस बल में रहने लायक नहीं है। इसलिए जांच के बाद SI महेश सिंह को पुलिस सेवा से पदच्युत (Dismiss) करने का आदेश उनके द्वारा दिया गया है।
