लखीमपुर खीरी में उपद्रव के बाद भड़की हिंसा में चार किसान सहित आठ लोगों की मौत के प्रकरण के सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी एक कदम आगे बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बड़े मामले की जांच इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज को सौंप दी है। इस जांच के लिए सरकार ने एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग बनाकर अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ जांच पूरी करने करने के लिए दो महीने का समय निर्धारित किया गया है।
लखीमपुर खीरी में बीते रविवार को उपद्रव के बाद भड़की हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसान नेताओं से वार्ता के बाद मृतकों के परिवार को 45-45 लाख रुपए की आॢथक सहायता, पीडि़त परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी तथा मामले की जांच इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड से कराने पर सहमति जताई थी। इसी क्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को अब लखीमपुर खीरी मामले की जांच सौंपी गई है। लखीमपुर खीरी में उनकी जांच टीम का मुख्यालय होगा। इस समिति को अपनी जांच रिपोर्ट दो महीने में सरकार को सौंपनी होगी।
उधर सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी की घटना का संज्ञान लेते हुए गुरुवार को इस मामले की सुनवाई का फैसला किया है। चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई कार्यसूची के अनुसार, चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और हिमा कोहली की तीन जजों की पीठ गुरुवार को लखीमपुर खीरी में हिंसा में मौत के कारण, शीर्षक वाले मामले की सुनवाई करेगी।

