लखीमपुर में 4 किसानों की केंद्रीय मंत्री के बेटे की गाड़ी से कुचलकर हुई मौत के बाद मचा बवाल फिलहाल शांत होता नजर आ रहा है। प्रशासन और किसानों के बीच सहमति बन गई है। एडीजी प्रशांत कुमार ने किसान नेताओं के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी है। रविवार को किसानों के प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में लखीमपुर में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें से 4 किसानों की मौत गाड़ी से कुचलकर हुई है।
एडीजी के मुताबिक, किसानों से बातचीत में तय हुआ है कि मृतकों के परिजनों को 45-45 लाख रुपए और घायलों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी और आठ दिन में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होगी। इसके अलावा सरकार ने रिटायर जज की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी द्वारा पूरी घटना की जांच कराने पर सहमति जताई है।
पहली बार किसी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री पर होगी FIR
एडीजी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अफसरों से कई राउंड की मीटिंग हुई, जिसमें सहमति बनी है। अफसरों ने माना है कि मंत्री के बेटे की गलती है, रोके जाने के बाद भी आशीष ने काफिला नहीं रोका। जिसके चलते इतनी बड़ी घटना घट गई।
टिकैत ने आगे बताया कि रविवार को हुई घटना को लेकर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र पर भी FIR दर्ज की जाएगी। उनके मुताबिक ऐसा पहली बार है, जब किसी गृह राज्यमंत्री पर मुकदमा दर्ज हो रहा है। इस दौरान भाकियू प्रवक्ता ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 11 दिनों में हमारी मांगे पूरी नहीं की गईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अंतिम संस्कार न करने की चेतावनी दी थी
रविवार को हुई हिंसा के बाद भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत सोमवार तड़के साढ़े पांच बजे लखीमपुर खीरी पहुंचे। इसके बाद से ही टिकैत समेत प्रमुख किसान नेताओं की डीएम-एसएसपी से बातचीत हो रही थी। किसान नेताओं का लगातार यही कहना था कि जब तक सारी मांगें नहीं मानी जाएंगी, तब तक शवों का अंतिम संस्कार नहीं होगा।
चौथे चरण की वार्ता में बनी सहमति
दूसरे चरण की वार्ता 9 बजे और तीसरे चरण की वार्ता 10 बजे हुई थी। इसके बाद साढ़े 12 बजे राकेश टिकैत ने अन्य किसान नेताओं से अलग बातचीत की। इसमें आगे की वार्ता को लेकर रणनीति बनी। इसके बाद हुई चौथे चरण की वार्ता में किसानों और प्रशासन के बीच सहमति बनी।
बातचीत की शुरुआत में किसानों की ये थीं प्रमुख मांगें
सुबह जब बातचीत शुरू हुई तब किसान नेताओं की मांग थी कि मंत्री, उनके बेटे व समर्थकों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो और मंत्री को बर्खास्त किया जाए। साथ ही परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा मिले और पूरे केस की न्यायिक जांच हो।
