कोरोना की तीसरी लहर को बेअसर तो हो सकती है, लेकिन कुछ व्यवस्था ऐसी है जो जिले के लिए जरूरी है। आज तक एल-3 श्रेणी का अस्पताल तक जिले में नहीं बन पाया है। एल-2 श्रेणी के अस्पताल तो हैं, लेकिन उसमें उच्च श्रेणी की व्यवस्था नहीं है। बेड की संख्या भी कम है।
जिले में कोरोना ने कहर बरपाया था, जिसमें लोगों की जाने चली गई थी। गंभीर अवस्था में किसी को मेरठ तो किसी को गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इन अस्पतालों में भी लोगों की जानें गई। प्राइवेट अस्पतालों में सैकड़ों लोगों ने अपना इलाज कराया था। जिले में इतना सब कुछ होने के बावजूद आज तक जिले में एल-3 श्रेणी का अस्पताल नहीं बनाया गया था, जिसमें उच्च श्रेणी की मशीन, विशेषज्ञ डाक्टर और इलाज के लिए हाईलेवर के वेंटीलेटर हो। शासन के निर्देश पर पहली लहर में जहां एक-1 श्रेणी का कोविड-19 अस्पताल टटीरी में, एल-2 श्रेणी का अस्पताल खेकड़ा में बनाया गया था। तीसरी लहर में वायरस का खतरा बढ़ा तो एल-2 श्रेणी के सरूरपुर कला को अस्पताल बनाया गया। खेकड़ा पहले से ही संचालित था। दोनो जगह 75-75 बेड अधिकृत किए गए। यहां पर भी वो सुविधाएं नहीं है जहां पर लोगों को अच्छा इलाज मिल सके।
