अलीगढ़ में 24 साल से दो संप्रदायों के बीच जंग लड़ रहा एडीए, अब फिर गर्माया मामला, जानिए विस्‍तार से -Ripe News-

Vishal Dubey
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विवादित कब्रिस्तान को लेकर पनपा विवाद कोई नया नहीं हैं। अलीगढ़ विकास प्राधिकरण पिछले 24 साल से इसके खिलाफ जंग लड़ रहा है। 1997 में जबरन कब्जे के आरोप में प्राधिकरण की तरफ से क्वार्सी थाना क्षेत्र में एक मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। वहीं, दूसरा पक्ष इसे कब्रिस्तान की भूमि होने का दावा कर रहा है। मामला दो संप्रदायों से जुड़ा होने के चलते विवाद अब तक फंसा हुआ है।

यह है मामला

कब्रिस्तान की भूमि को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद दैनिक जागरण ने शनिवार को पड़ताल की तो एडीए का एक 24 साल पुराना पत्र हाथ लगा। एडीए के तत्कालीन सचिव डीएस गरवाल की तरफ से डीएम को यह पत्र भेजा गया है। सचिव ने एडीए की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की मांग की थी। पत्र में लिखा था कि गोविला गैस एजेंसी के सामने गाटा संख्या 21 में एडीए ने कुल 0.0810 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। इसके लिए 75205 रुपये का मुआवजा दिया। खातेधार इस मुआवजे के विरोध में उच्च न्यायालय भी गया, लेकिन 1985 में इनकी रिट खारिज हो गई। खतौनी में यह प्राधिकरण की जमीन है। वक्फ बोर्ड के नक्शे से भी साफ है कि यहां कोई कब्रिस्तान दर्ज नहीं है। 24 अगस्त 1997 को पहली बार यहां कुछ लोगों ने ईंट गारे से पक्की कब्र बनानी शुरू की थी। तीन चार जगह मिट्टी की कब्र भी इसी दिन बनाई गईं थी, लेकिन लोगों का तर्क था कि यह फकीर बाबा की पुरानी कब्र है। जबकि प्राधिकरण ने इस जमीन का खातेधारक से अधिग्रहण किया था। इस पर डीएम ने पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसने काम रुकवा दिया था। इसी दौरान एडीए के अधिशासी अभियंता की तरफ से इस मामले में क्वार्सी थाना क्षेत्र में कब्जे के आरोप में एक मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। इसमें डा. अब्दुल सत्तार सत्यवान पर सांप्रदायिकता की आड़ में मामले को तूल देने के आरोप लगाए थे, उस दौरान तो कुछ दिन के लिए यह मामला ठंडा हो गया, लेकिन कब्जा एडीए को नहीं मिल सका। इसके बाद कई बार पत्र लिखे गए। नए अफसर भी आए, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी कब्जा एडीए को नहीं मिल सका।

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