सिख दंगा एसआईटी की जांच पर उठे सवाल:मकान मालिक बोले 1990 से मेरे घर का कोई भी कमरा बंद नहीं है, फोरेंसिक टीम ने कब और कहां से खून के धब्बों की जांच की मुझे भी नहीं पता- Ripe News

Vishal Dubey
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सिख दंगा एसआईटी की जांच पर उठे सवाल:मकान मालिक बोले 1990 से मेरे घर का कोई भी कमरा बंद नहीं है, फोरेंसिक टीम ने कब और कहां से खून के धब्बों की जांच की मुझे भी नहीं पता


एसआईटी ने गोविंद नगर थानाक्षेत्र के दबौली स्थित इसी मकान की करने पहुंची थी जांच, इस मकान में दो सिखों की हुई थी नृशंस हत्या - Dainik Bhaskar
एसआईटी ने गोविंद नगर थानाक्षेत्र के दबौली स्थित इसी मकान की करने पहुंची थी जांच, इस मकान में दो सिखों की हुई थी नृशंस हत्या
मौजूदा समय में इस मकान में रहने वाले अंगददीप सिंह रोषी
मौजूदा समय में इस मकान में रहने वाले अंगददीप सिंह रोषी

1984 में दबौली के इस मकान में हुई थी दो सरदारों की नृशंस हत्या फिर फूंक दिया था शव

सिख दंगे की जांच कर रही एसआईटी के एसएसपी बालेंद्रु भूषण ने बताया कि 1 नवंबर 1984 को गोविंद नगर इलाके में सिख दंगे के दौरान कारोबारी तेज प्रताप सिंह (45) और बेटे सत्यवीर सिंह (22) की घर में हत्या करने के बाद शव जला दिया गया था। उनके दबौली एल-ब्लॉक स्थित मकान संख्या-28 दो कमरे दंगे के बाद से बंद पड़े थे। उन कमरों को खुलवाकर जांच की गई तो खून के धब्बे और शव फूंकने के निशान भी मिले हैं। एसआईटी के दावों की भास्कर ने पड़ताल की तो मकान में रहने वाले अंगद दीप सिंह रोषी ने बताया कि उनके पिता स्व. हरविंदर सिंह ने 1990 में यह मकान खरीदा था। इसके बाद से लगातार पूरे मकान का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक भी कमरा सन 1990 के बाद से बंद नहीं है। एसआईटी और फोरेंसिक टीम बीते मंगलवार को आई थी उन्होंने पूछा था कि कब से आप यहां रहते हैं...? मैंने बताया कि मेरा जन्म इसी मकान में हुआ है। इसके बाद से मकान की कई बार मरम्मत और पुताई भी हुई है। टीम ने घर के अंदर गई थी और 15-20 मिनट बैठने के बाद चली गई। मुझे नहीं पता चला कि कब उन्होंने मेरे घर में केमिकल परीक्षण करके खून के धब्बे के साक्ष्य जुटा लिए और शव जलाने के निशान मिले हैं।

मकान के जांच की फोरेंसिक रिपेार्ट
मकान के जांच की फोरेंसिक रिपेार्ट

जिस फर्श से खून के धब्बे मिले 10 साल से उस कमरे में चल रहा था पानी का प्लांट
मकान मालिक अंगद दीप सिंह रोषी ने बताया कि जहां से एसआईटी खून के धब्बे मिलने का दावा कर रही है। उन कमरों में पिछले दस सालों से वह पानी का प्लांट चला रहे थे। फर्श पर परमानेंट पानी रहता था। पिता के निधन के बाद दो साल पहले उन्होंने अपना प्लांट बंद किया है। एक भी कमरा बंद नहीं था मकान खरीदने के बाद 30 सालों से लगातार सभी कमरे इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

मकान की फोरेंसिक टीम

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