वाराणसी में प्रधान डाकघर के बाबुओं और कचहरी से जुड़े कुछ वकीलों की मिलीभगत से फर्जी निवास प्रमाण पत्र तैयार किए जा रहे हैं। इसका खुलासा एडीएम फाइनेंस ऑफिस में हुआ जब आधार कार्ड बनवाने के लिए आए आवेदनों की जांच हुई। आवेदन पत्र के साथ लगाए गए निवास प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए गए। आवेदकों को कार्यालय बुलाकर पूछताछ की गई तो डाकघर के एक बाबू, कचहरी से जुड़े एक वकील और साइबर कैफे की संलिप्तता सामने आई। दो महीने पहले भी फर्जी निवास प्रमाण पत्र के मामले में प्रधान डाकघर नदेसर के बाबू को गिरफ्तार किया गया था। एडीएम फाइनेंस वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि अभी अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है।
ऐसे पकड़ में आया मामला
रोहनिया के नरूर की अफसरीन ने आधार कार्ड बनवाने के लिए निवास प्रमाण पत्र समेत अन्य प्रमाण पत्र जमा किए थे। एडीएम फाइनेंस के ऑफिस ने जब जांच की तो तहसील से जारी अफसरीन का निवास प्रमाण पत्र फर्जी निकला। एडीएम फाइनेंस वंदिता श्रीवास्तव ने अफसरीन को अपने दफ्तर बुलाया। पिता के साथ पहुंची अफसरीन से निवास प्रमाण पत्र कहां, किससे बनवाया के बाबत पूछा गया तो उसने बताया कि नदेसर स्थित डाकघर के बाबू ने प्रमाण पत्र दिया था। इस काम में एक वकील ने मदद की थी। पूछताछ में जानकारी मिली कि कचहरी में परिसर में भी कोई फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराता है।
तीन महीने में 08 फर्जी दस्तावेज पकड़ में आए
एडीएम फाइनेंस वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले तीन महीने में 08 ऐसे आवेदन पकड़ में आए जिसमें फर्जी, आय जाति, निवास प्रमाण पत्र लगाए गए थे। सभी मामलों में प्रधान डाकघर के बाबुओं की संलिप्तता सामने आई है। साथ ही जिले के कई जन सेवा केंद्रों, साइबर कैफे भी नकली दस्तावेज तैयार कर रहे हैं। गोपनीय तरीके से इसकी जांच कराई जा रही है। डाकघर के बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए पोस्टमास्टर जनरल के साथ ही शासन में पत्र लिखा जाएगा।
थाने से ही छूट गया था बाबू
वाराणसी के नदेसर स्थित प्रधान डाकघर में तैनात बाबू दीपक को फर्जी आय जाति प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में कैंट पुलिस ने 18 जून को केस दर्ज होने के बाद थाने बुलाया लेकिन थोड़ी देर बाद छोड़ दिया गया। पुलिस को आरोपी बाबू के पास से कई फर्जी प्रमाण पत्र भी बरामद हुए थे। तहसील सदर में वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात बाबू राजकुमार वर्मा ने डाकघर के बाबू दीपक प्रसाद पर कैंट थाने में बीएनएस की धारा 201 में केस दर्ज कराया था। दीपक ने कोतवाली थाना क्षेत्र की सादिक बीबी, तरन्नुम बीबी, वरुणापुल कैंट की खुशी कुमारी, छीत्तनपुरा की तबस्सुम के आय जाति से जुड़े फर्जी प्रमाण पत्र बनाए थे। एडीएम फाइनेंस के ऑफिस में दस्तावेजों की जांच के दौरान दीपक की करतूत उजागर हुई थी।