“कठिनाइयों को हराकर जो चलता है, वही इतिहास रचता है।”
यह पंक्ति आज गायघाट वाराणसी के युवा सक्षम बादल पर पूरी तरह फिट बैठती है। सक्षम ने पहले आईआईटी में शानदार प्रदर्शन कर अखिल भारतीय सामान्य श्रेणी में 3223 रैंक हासिल की थी, और अब NEET 2025 में भी अखिल भारतीय सामान्य श्रेणी में 1907वीं रैंक लाकर यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची मेहनत और इच्छाशक्ति के आगे कोई भी मंज़िल असंभव नहीं होती।
बचपन से ही संघर्षों से भरी थी ज़िंदगी
सक्षम का बचपन उन बच्चों जैसा नहीं था जिनके पास हर सुख-सुविधा होती है। पिता ने बचपन में ही साथ छोड़ दिया था, और मां – एक शिक्षामित्र – ने सीमित संसाधनों में बेटे को पालने और पढ़ाने का संकल्प लिया। आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और जिम्मेदारियों से भरे वातावरण में सक्षम ने अपनी राह खुद बनाई।
जब खुद 10वीं में पढ़ रहे थे, तब 11वीं के बच्चों को पढ़ा रहे थे
लॉकडाउन के दौरान जब देश के ज्यादातर छात्र ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा से जूझ रहे थे, तब सक्षम ने अपनी शिक्षा को बोझ नहीं, अवसर में बदला।
उन्होंने न सिर्फ अपना सिलेबस समय से पहले पूरा किया, बल्कि अपनी आयु से बड़े छात्रों को ट्यूशन देना शुरू किया, ताकि मां का आर्थिक बोझ हल्का हो सके।
IIT-JEE में 3223वीं रैंक, फिर भी नहीं रुके कदम
बिना किसी बड़ी कोचिंग या संसाधनों के, सक्षम ने जेईई एडवांस्ड में 3223वीं रैंक हासिल कर IIT में प्रवेश पाया। यहां तक पहुंचना ही बहुतों का सपना होता है, लेकिन सक्षम के सपने वहीं नहीं रुके।
अब NEET 2025 में 912 वीं रैंक से रचा नया इतिहास
आज, 14 जून 2025, NEET का परिणाम घोषित हुआ और सक्षम बादल ने एक बार फिर सभी को चौंका दिया।
NEET 2025 में सक्षम ने कैटेगरी में 912 वीं तथा सामान्य श्रेणी में 1907वीं रैंक प्राप्त की – बिना कोचिंग, बिना दिखावे और सिर्फ अपनी आत्म-प्रेरणा के दम पर।
अब उनके पास देश के बेहतरीन मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का अवसर है।
मां की तपस्या, बेटे का परिणाम
सक्षम की मां ने बेटे के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया, भले ही खुद कई बार भूखे पेट सोई हों। एक शिक्षामित्र की मामूली तनख्वाह में घर चलाना, बेटे की पढ़ाई, और समाज का दबाव – इन सबसे लड़ते हुए उन्होंने बेटे को कभी हौसला नहीं खोने दिया।
सक्षम की कहानी सिर्फ एक सफलता नहीं – एक प्रेरणा है
“अगर जीवन बार-बार गिराए, तो हर बार उठने का हुनर सीखो।
क्योंकि जो खुद को जीत ले, वही असली विजेता होता है।”
– सक्षम बादल
आज सक्षम उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल हैं जो मानते हैं कि संसाधनों के अभाव में सफलता नहीं मिल सकती। उन्होंने यह दिखा दिया कि सपने सिर्फ देखने से नहीं, जागकर जीने से पूरे होते हैं।
इस अवसर पर उसके शिक्षक उज्ज्वल कन्नौजिया सहित तमाम परिजनो ने मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की