इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आरक्षण लेने के कारण नियुक्ति देने में भेदभाव नहीं किया जा सकता। सामान्य वर्ग की चयनित महिला अभ्यर्थी से अधिक अंक हासिल करने वाली ओबीसी कोटे की याचियों को नियुक्ति पाने का हक है।
कोर्ट ने यह बात शुक्रवार को पुलिस कांस्टेबल भर्ती में नियुक्ति देने के मामले में कही। दरअसल, पिछड़ा वर्ग के क्षैतिज आरक्षण में असफल होने व सामान्य कोटे की चयनित महिला अभ्यर्थी से अधिक अंक पाने के बावजूद याची को पुलिस कांस्टेबल भर्ती में नियुक्ति नहीं मिली थी। कोर्ट ने इसे मनमाना करार दिया है।
यूपी सरकार को नियुक्ति करने का दिया आदेश
कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड व यूपी सरकार को निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के सौरव यादव केस के फैसले के तहत तीन माह में याचियों की नियुक्ति की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने रुचि यादव व 15 अन्य, प्रियंका यादव व अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याची बोले- नियुक्ति देने में भेदभाव नहीं किया जा सकता
याचियों का कहना था कि क्षैतिज आरक्षण में उन्हें कट ऑफ मेरिट से कम अंक प्राप्त हुए, जिससे उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी। अभी भी बहुत से पद खाली हैं। उन्हें सामान्य वर्ग की अंतिम चयनित महिला अभ्यर्थी से ज्यादा अंक मिले हैं। क्योंकि उन्होंने आरक्षण मांगा था, इस आधार पर नियुक्ति देने में भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कट ऑफ मेरिट अंक से अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थी को नियुक्ति देने से इंकार नहीं किया जा सकता।
सरकार ने कहा- आरक्षण का दोहरा लाभ नहीं मिल सकता
सरकार का कहना था कि याचियों को आरक्षण का दोहरा लाभ नहीं मिल सकता। वह पिछड़े वर्ग की महिला कोटे में सफल नहीं हुई। इसलिए सामान्य वर्ग के महिला कोटे की बराबरी की मांग नहीं कर सकती। लेकिन कोर्ट ने नहीं माना। कोर्ट ने पिछड़ा वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को सामान्य कोटे की महिला अभ्यर्थी से अधिक अंक के आधार पर नियुक्ति का आदेश दिया है।
