मायावती ने जेल में बंद विधायक मुख्तार अंसारी की जगह बसपा प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर को मऊ की सदर सीट से टिकट देने का शुक्रवार को एलान किया है। इसको लेकर जिले की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। हालांकि भीम राजभर को पहले भी मायावती ने विधानसभा का चुनाव मऊ की सदर सीट से लड़वाया था लेकिन उस समय इनका प्रतिद्वन्दी कौएद का प्रत्याशी मुख्तार रहा। मुख्तार ने भीम राजभर को कड़ी टक्कर देते हुए पराजित कर दिया था। वैसे इस समय बसपा से मौजूदा विधायक मुख्तार का टिकट काट मायावती ने पुन: भीम राजभर के नाम की घोषणा कर जिले में राजभर कार्ड फेंका है जिसके परिणाम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
बता दें कि 1995 में जेल से छूटने के बाद गाजीपुर जनपद के युसुफपुर मुहम्मदाबाद निवासी मुख्तार अंसारी ने मऊ में अड्डा जमाया। बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के साथ ही मऊ में बड़ी रैली निकाल ताकत का एहसास कराकर एक वर्ष बाद 1996 में विधायक बन बैठा। फिर 2002 में निर्दलीय विधायक चुने जाने के तीन वर्ष बाद यानि 2005 में मऊ जनपद महीनों तक दंगे की आग में जलता रहा। इसके छीटें मुख्तार अंसारी पर भी पड़े परंतु इसको चाहने वालों की तादाद लंबी होती गई। इसके बाद 2007, 2012 तथा 2017 में लगातार मुख्तार अंसारी बसपा के बैनर पर विधायक चुना गया। 2005 में गाजीपुर के मुहम्मदाबाद विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद से अब तक जेल में बंद मुख्तार अंसारी लगातार जेल से जहां चुनाव जीतता रहा और अपने आपराधिक तंत्र को भी चलाता रहा। अब बसपा मुखिया मायावती ने अपराधियों से तौबा करते हुए मुख्तार अंसारी को आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में टिकट देने से मना कर दिया है।
बता दें कि 1995 में जेल से छूटने के बाद गाजीपुर जनपद के युसुफपुर मुहम्मदाबाद निवासी मुख्तार अंसारी ने मऊ में अड्डा जमाया। बहुजन समाज पार्टी में शामिल होने के साथ ही मऊ में बड़ी रैली निकाल ताकत का एहसास कराकर एक वर्ष बाद 1996 में विधायक बन बैठा। फिर 2002 में निर्दलीय विधायक चुने जाने के तीन वर्ष बाद यानि 2005 में मऊ जनपद महीनों तक दंगे की आग में जलता रहा। इसके छीटें मुख्तार अंसारी पर भी पड़े परंतु इसको चाहने वालों की तादाद लंबी होती गई। इसके बाद 2007, 2012 तथा 2017 में लगातार मुख्तार अंसारी बसपा के बैनर पर विधायक चुना गया। 2005 में गाजीपुर के मुहम्मदाबाद विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद से अब तक जेल में बंद मुख्तार अंसारी लगातार जेल से जहां चुनाव जीतता रहा और अपने आपराधिक तंत्र को भी चलाता रहा। अब बसपा मुखिया मायावती ने अपराधियों से तौबा करते हुए मुख्तार अंसारी को आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में टिकट देने से मना कर दिया है।
सेना की नौकरी नहीं आई रास, दे दिया था त्यागपत्र
बसपा प्रदेश अध्यक्ष व सदर विधान सभा प्रत्याशी भीम राजभर मऊ के कोपागंज ब्लाक के मोहम्मदपुर बाबूपुर गांव के निवासी हैं। इनके पिता रामबली राजभर कोल फील्ड में नौकरी करते थे ये अपने परिवार के एकलौते कर्ता-धर्ता है इनकी मात्र एक बहन है। एमए की पढ़ाई करने के बाद ये सेना में भर्ती हो गए। छत्तीसगढ़ में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पहली पोस्टिंग मे ही नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। सन 1995 में नेहरु युवा केंद्र से जुड़ कर काम करने लगे। उसी दौरान इन्होंने अपने गांव में शहीद मुन्ना राजभर की प्रतिमा की स्थापना कराई और उनकी पुण्यतिथि पर लोक कलाओं को बढ़ावा देने के लिए लोक रंग महोत्सव का आयोजन करते रहे। सन 1998 में बहुजन समाज पार्टी से जुड़े। पार्टी में धीरे-धीरे ऊंचाइयां चढ़ते गए और सन 2000 में बसपा की सरकार में इन्हें पहली बार जिलाध्यक्ष बनाया। इसके बाद कई बार अध्यक्ष बने और 2012 में पार्टी के टिकट पर सदर विधान सभा का चुनाव लड़े और मुख्तार से हार गए। इसके बाद इस वर्ष उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ ही पार्टी ने पुन: सदर विधान सभा का प्रत्याशी बनाया है।