कोरोना काल में जिला कारागार के अंदर की बेनूर दुनिया में भी बंदियों के हुनर ने रंग भर दिए हैं। कोई लिखने में माहिर हैं तो किसी ने अपनी पेंटिंग से अफसरों को मन मोह लिया। कुछ ने अंगुलियों की ऐसी कारीगरी दिखाई कि खूबसूरत कागज के बैग्स, मोमबत्ती, मैट, मेजपोश, डलिया आदि बना डाले। सामाजिक कार्यकर्ता की पहल पर बंदियों के हुनर को अब आनलाइन मंच पर निखारने की तैयारी है। इसके तहत बंदियों के बनाए सामान की आनलाइन बिक्री होगी।
रचनात्मक वस्तुओं का निर्माण
वर्तमान में जिला कारागार में साढ़े तीन हजार बंदी हैं। इनमें हाथरस के करीब 1200 बंदी शामिल हैं। मार्च 2020 से बंदियों की मुलाकात पूरी तरह से बंद है। ऐसे में बंदी अवसाद में न जाए, इसके लिए जेल में कई गतिविधियां करवाई जाती हैं। बंदी लघु-कुटीर उद्योगों से भी जोड़े गए। उन्हें छोटी-छोटी रचनात्मक वस्तुओं के निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया। 25-30 बंदियों के समूह ने कोरोना काल में कागज के बैग्स, मोमबत्ती, मैट बनाना, मेजपोश, डलिया आदि तैयार किए। डेकोरेटेड फ्लावर पाट को भी बनवाया जा रहा है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता मारिया आलम की पहल पर बंदियों की ओर से बनाए गए सामानों को आनलाइन प्लेटफार्म पर बेचने की तैयारी की जा रही है। इससे बंदियों का मनोबल बढ़ेगा। साथ ही उनकी आय भी होगी।
