महराजगंज में 686 करोड़ रुपये की दवाओं की बरामदगी मामले में फरार मुख्य आरोपित गोविंद गुप्ता लंबे समय से नेपाल सीमा पर दवाओं की तस्करी से जुड़ा है। इसमें विभागीय संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता है। तीन साल पूर्व तत्कालीन डीएम अमरनाथ उपाध्याय के निर्देश पर विभाग ने नशीली दवाएं बरामद कर ब्लैकलिस्टेड करते हुए उसके भारत मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त कर दिया था। उसके बाद उसी साल के अंत में आरोपित ने विभागीय संरक्षण में अपने ही नाम से आयुष मेडिकल स्टोर का नया पंजीकरण कराया और फिर बड़े पैमाने पर नशे के कारोबार में फिर से लिप्त हो गया था।
पांच फरवरी को गाेविंद के दो सहयोगियों को पकड़ा था पुलिस ने
अभी पांच फरवरी को भी पुलिस ने उसके दो सहयोगियों भगवानपुर निवासी आशीष और गड़ौरा निवासी इशहाक को नशीली दवाओं के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपित बोरी में दवा लेकर नेपाल जा रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि दुकानों पर ड्रग इंस्पेक्टर की छापेमारी के पूर्व ही गोविंद को सूचना मिल जाती है, जिसकी वजह से उनका कारोबार बेरोक-टोक चलता रहता है। उन्होंने यह भी बताया था कि नेपाल में बड़ी मात्रा में दवाएं भेजने के लिए गोविंद के घर से सप्लाई दी जाती है। वह दवाएं कहां से लाता था, इसका पता नहीं चल सका है। पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हुई हैं।
