महाराष्ट्र के किसानों को किसान एक्सप्रेस भाने लगी है। अब वे प्याज सीधे पूर्वांचल की मंडियों में भेज रहे हैं। इससे जहां किसानों को लाभ मिल रहा है, वहीं व्यवसायियों को भी माल भाड़ा के मद में कम खर्च करना पड़ रहा है। सड़क मार्ग से प्याज मंगवाने पर प्रति क्विंटल 450 रुपये का खर्च आता है, वहीं किसान एक्सप्रेस से लागत सिर्फ 250 रुपये क्विंटल आ रहा है। माल भाड़ा कम होने से आम लोगों को भी सस्ता प्याज मिलना शुरू हो गया है। फुटकर बाजार में प्याज का दाम 30 रुपये से घटकर 25 रुपये हो गया है।
प्याज के दाम में प्रति क्विंटल दो सौ रुपये की आई कमी
गोरखपुर में प्याज की प्रतिदिन 100 से लेकर 120 टन की खपत है। स्थानीय मंडी में प्याज नासिक और मध्य प्रदेश के शाजापुर एवं इंदौर से आता है। डीजल के दाम में बढ़ोतरी का असर भी प्याज की कीमतों पर पड़ता है। किसान एक्सप्रेस चलने से व्यापारियों के साथ-साथ किसानों को फायदा हो रहा है। दरअसल किसान अपना उत्पाद स्थानीय मंडी में बेचते थे और फिर वहां से देश के अलग-अलग हिस्सों में प्याज भेजा जाता था। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। बड़े कारोबारी सस्ते में खरीदकर ऊंचे दामों पर प्याज बेचकर खूब मुनाफा कमाते हैं, लेकिन किसान एक्सप्रेस की वजह से किसान अपना माल सीधे मंडियों में बेच रहे हैं। दो दिन पहले किसान एक्सप्रेस से 238 टन प्याज गोरखपुर पहुंचा। ब्रोकर के माध्यम से किसानों ने प्याज भिजवाया था।
