इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर जिले के पनवडिया गांव में तालाब के सुंदरीकरण की योजना की उपयोगिता का परीक्षण किए बगैर 796.89 लाख रुपये की मंजूरी और 300 लाख की किश्त हड़पकर छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाने के लिए अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।कोर्ट ने सरकारी धन की लूट पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले अनुपयोगी योजना तैयार कर मंजूरी दी, फिर ब्लेम गेम करते हुए जांच बैठाकर चार छोटे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए पल्ला झाड़ लिया। 300 लाख के घोटाले के जवाबदेह रामपुर व लखनऊ के बड़े अधिकारी भी हैं। इसी के साथ कोर्ट ने प्रोजेक्ट के कनिष्ठ अभियंता सरफराज फारूक की पुलिस रिपोर्ट पेश होने या 90 दिन के लिए अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने दिया है। कोर्ट ने मामले में नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया है। प्रमुख सचिव शहरी योजना एवं विकास की अध्यक्षता में डीआईजी मुरादाबाद की दो सदस्यीय टीम गठित की है। कोर्ट ने एसआईटी से प्रोजेक्ट का डीपीआर तैयार होने से लेकर योजना की मंजूरी, धन के खर्च व घोटाले की शुरुआत से अंत तक की जांच छह माह में पूरी करने का निर्देश दिया है।साथ ही 18 अक्तूबर को रिपोर्ट मांगी है।
